1983 का यह दौर भारत के लिए नयी खुशियाँ भी लेकर आया था क्योंकि यह पहली बार हुआ था जब क्रिकेट विश्वकप में भारत ने जीत का लगातार प्रदर्शन किया|
पहला मुक़ाबला भारत का वेस्टइंडीज के साथ हुआ जहाँ वेस्टइंडीज को 34 रन से हार का सामना करना पड़ा| और इस जीत का शोर इतना तेज़ था कि सभी देशों में भारत का नाम क्रिकेट क्षेत्र में जाना जाने लगा| रेडियो, टीवी सेट्स सभी पर भारत की जीत की चर्चा हो रही थी| इस मुक़ाबले से भारत ने क्रिकेट क्षेत्र में अपनी जीत का खाता भी खोल लिया था|
अब भारतीय लोगो की उम्मीदें और बढ़ने लगी| वहीं अगला मुक़ाबला भारत और जिम्बॉव्वे के बीच था और देखते ही देखते भारत ने यह दूसरा मुक़ाबला भी जीत लिया| और अब अगला मुक़ाबला भारत का ऑस्ट्रेलिया से होना था यह भारत के लिए थोड़ी परेशानी वाली बात थी|
वही अगले और मुक़ाबले ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ के साथ होने वाले थे और वही सुनील गावस्कर बीमार पड़ गए ओर इसके चलते भारतीय क्रिकेट टीम के हाथ से यह दोनों मुक़ाबले निकाल गए, (भारत को हार का सामना करना पड़ा)| अब इसके बाद भारत के पास सिर्फ एक ही रास्ता था जो सेमीफिनल की तरफ जाता था| अगर यह रास्ता बंद हो जाता तो भारत को वापस हिंदुस्तान आना शेष रह जाता|
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अब फिर से मुक़ाबला जिम्बॉव्वे के साथ था, लेकिन अगर भारत यह मुक़ाबला हार जाता तो भारत को वापसी लेनी पड़ती| और मीटिंग के दौरान भारत का टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी लेना तय किया गया| अब सिक्के ने भी भारत का साथ दिया और पहले बल्लेबाजी भी की| वही भारत के मात्र 30 मिनट में 5 विकेट गिर गए और सिर्फ 17 रन भारत हासिल कर पाया था| और ये समय भारत के लिए शर्मसार होने वाला था| तब सभी को कप्तान कपिल देव की जरूरत महसूस हो रही थी ओर उस समय कपिल देव ड्रेसिंग रूम भी नहीं थे|
अब कपिल देव हाथों में बल्ला लेकर मैदान में पहुंचे और अगले 30 मिनट में पूरे मैच की कहानी ही बदल गयी| ऐसा लग रहा था मानो कपिल देव भारतीय बल्लेवाजों का गुस्सा जिम्बॉव्वे पर उतार रहे हैं| और इसी बीच लंच ब्रेक हुआ और भारत के सारे बल्लेवाज़ कपिल देव की डांट के डर से ड्रेसिंग रूम में चले गए| उस समय कपिल देव एक ऐसी पारी खेल रहे थे जिसने भारतीय क्रिकेट टीम का इतिहास रच डाला|
चौके और छक्कों की तो मानो बरसात हो रही हो| लेकिन बीबीसी की हड़ताल के चलते ये पारी रेकॉर्ड नहीं की जा सकी, वरन यहाँ 138 गेंदों पर 16 चौके और 6 छक्के कपिल देव ने जड़े ओर 175 रनों की यादगार पारी खेल गए| यह वन-डे क्रिकेट की सबसे शानदार पारी में से एक थी| देखते ही देखते भारत का स्कोर 266 रन पर जा पहुंचा| ओर यह मुक़ाबला भारत ने 31 रन से जीत लिया|
अब मुक़ाबला था ऑस्ट्रेलिया के साथ –
अब जो हुआ वो इतिहास के पन्नो पर जा छपा क्योंकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 118 रन से हराया जो ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत ही शर्म की बात थी| ऐसा करके भारत ने पहली बार अपनी जगह क्रिकेट वर्ल्डकप के सेमीफिनल में बना ली| अब भारतीय टीम चमत्कार दिखा रही थी| वही अब भारत ने 6 विकेट से यह मुक़ाबला जीत लिया जो भारत के लिए एक सपने जैसा था ओर जिमी अमरनाथ वही सेमीफिनल के बहुत बड़े सितारे के जैसे उभरकर सामने आए|

