क्रिकेट एक ऐसा अंतरराष्ट्रिय खेल है जिसको देखने के लिए जनता हमेंशा उत्सुक रहती हैं। सारे देश पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, आस्ट्रेलिया, श्रीलंका, इंग्लैंड इस खेल में बड़ी भूमिका निभाते नजर आते हैं। 1983 में क्रिकेट विश्वकप में कपिल देव की भूमिका बड़ी ही शानदार रही है।
1983 के समय एशियन खेलों की चमक कम सी नजर आने लगी थी। और उसी समय भारत में कलर टीवी आ चुकी थी। और उसी समय भारतीय हॉकी टीम वर्ल्डकप हार चुकी थी। और तो और राजनीति भी उस समय शांत थी। वहीं असम देश के कई हिस्से सांप्रदायिक दंगो से लिपटे हुए थे। उस समय भारत को क्रिकेट या किसी और खेल की परवाह नहीं थी और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड वर्ल्डकप खेलने जा रही है।
जब 2 जून 1983 को भारतीय टीम इंग्लैंड के लिए रवाना हुई, तो लोगों को किसी खिलाड़ी से कोई ज्यादा मतलब नहीं था उनके लिए महज वह 14 खिलाड़ियों का झुंड था जो वर्ल्डकप में अपनी हाजिरी लगाने जा रहे थे। इतना ही नहीं भारतीय खिलाड़ियों ने यह भी सोच लिया था की वर्ल्डकप से अगर बाहर भी हो गए तो अमेरिका से छुट्टियाँ मनाकर लोटेंगे।
उस समय 14 खिलाड़ियों में कुछ भी खास बात नहीं थी बस उनका जुनून ही उनको एक-दूसरे से जोड़ना था। लेकिन इस जुनून के चलते उनके जज़्बातों को जगाने के लिए एक टकराब की आवश्यकता थी। जो इंग्लैंड पहुँचते ही प्रारम्भ हो गयी थी।
इतना ही नहीं विजडन मैग्जीन के संपादक डेविड फ्रिथ ने अपने एक लेख में भारतीय टीम का बहुत मज़ाक उड़ाया था। जिसमें उसने यह कहा था की भारतीय टीम इंग्लैंड महज हाजिरी देने आई है। यहाँ तक बोला गया था कि यह टीम क्रिकेट को अभी तक समझ नहीं पायी और भारतीय टीम को इस टूर्नामेंट से अपना नाम वापस लेना चाहिए।
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और डेविड फ्रिथ के इन वाक्यों ने भारतीय टीम को झकझोर दिया था। और इस वर्ल्डकप के पहले भारतीय की कामयाबी का कोई इतिहास नहीं था। और इसके पहले भारतीय टीम ने जितने भी वर्ल्ड कप खेले थे उनमें से 12 में जीत हासिल की थी और 28 बार हार का सामना किया था। वहीं वेस्टइंडीज़ दो बार चैम्पियन रह चुकी थी और भारत ने सिर्फ एक बार जीत हासिल की थी। वेस्टइंडीज़ उस समय बहुत ही जोरदार टीम हुआ करती थी।
अगले भाग में जानिए कैसे भारतीय टीम ने 1983 में रचा वर्ल्डकप जीतने का इतिहास?
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